Friday, 4 November 2022

आत्मा साक्षी विभुः पूर्ण

अष्टावक्र गीता 

अध्याय १

श्लोक ११

आत्मा साक्षी विभुः पूर्ण एकोमुक्तश्चिदक्रियः।।

असङ्गो निस्पृहः शान्तो भ्रमात्संसारवानिव।।।।११।।

अर्थ  :

आत्मा यद्यपि साक्षी, विभु (अन्तर्वयाप्त और बहिर्व्याप्त), पूर्ण, मुक्त, चिन्मात्र (चैतन्य) और अक्रिय, असङ्ग, निस्पृह, शान्त है, किन्तु केवल भ्रमवश ही संसार से युक्त प्रतीत होती है।

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಯಾಯ ೧

ಶ್ಲೋಕ ೧೧

ಆತ್ಮ ಸಾಕ್ಷೀ ವಿಭುಃ ಪೂರ್ಣ ಏಕೋ ಮೀಕ್ತಶ್ಚಿದಕ್ರಿಯಃ||

ಅಸಙ್ಗೋ ನಿಸ್ಪ್ರಹಃ ಶಾನ್ತೋ ಭ್ರಮಾತ್ ಸಂಸಾರವಾನಿವ ||

--೧೧--

Ashtavakra Gita 

Chapter 1

Stanza 11

The Self is the witness and all-pervading, perfect, one, free, Intelligence, actionless, unattached, desireless and quiet. Through illusion it appears of the world.

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Wednesday, 2 November 2022

मुक्ताभिमानी मुक्तो हि बद्धो

अष्टावक्र गीता

अध्याय १

श्लोक १०

मुक्ताभिमानी मुक्तो हि बद्धो बद्धाभिमान्यपि।।

किंवदन्तीह सत्येयं यामतिस्सा गतिर्भवेत्।।१०।।

(मुक्त-अभिमानी मुक्तः हि, बद्धः बद्ध-अभिमानी अपि।

किं वदन्ति इह सत्य इयं या मतिः सा गतिः भवेत्।।)

अर्थ :

जो आत्मा को अर्थात् अपने आपको (अविकारी, अविनाशी, नित्य, शुद्ध, बुद्ध) मुक्त जानता है, वह वस्तुतः और अवश्य मुक्त ही है, जबकि जो अपने आपके बारे में "मैं बद्ध हूँ" ऐसी मान्यता से ग्रस्त रहता है, वह इसी मान्यता से, इसलिए बद्ध ही होता है।

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಯಾಯ ೧

ಶ್ಲೋಕ ೧೦

ಮಿಕ್ತಾಭಿಮಾನೀ ಮುಕ್ತೋ ಹಿ ಭದ್ಧೇ ಬತ್ಧಾಭಿಮಾನ್ಯಪಿ ||

ಕಿಂ ವದನ್ತೀಹ ಸತ್ಯೇಯಂ ಯಾ ಮತಿಸ್ಸಾ ಗತಿರ್ಭವೇತ್ ||

--೧೦--

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Ashtavakra Gita

Chapter 1 

Stanza 10

One who considers oneself free is free indeed and one who considers oneself bound remains bound.

"As one thinks, so one becomes" is a popular saying in this world, which is true. 

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Tuesday, 1 November 2022

यत्र विश्वमिदं भाति

अष्टावक्र गीता 

अध्याय १

श्लोक ९

यत्र विश्वमिदं भाति कल्पितं रज्जुसर्पवत्।।

आनन्द परमानन्दः सबोधस्त्वं सुखं चर।।९।।

अर्थ :

जहाँ (जिस चैतन्य में) यह विश्व (संपूर्ण जगत) रज्जु में कल्पित सर्प की भाँति तुम्हें प्रतीत होता है, वह निज आनन्द-परमानन्द रूपी चैतन्य ही तुम्हारा स्वरूप है। अपने आनन्द के इस स्वरूप के बोध में सुखपूर्वक अवस्थित रहो।

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ 

ಅಧ್ಯಾಯ ೧

ಶ್ಲೋಕ ೯

ಯತ್ರ ವಿಶ್ವಮಿದಂ ಭಾತಾಕಲ್ಪಿತಂ ರಜ್ಜುಸರ್ಪವತ್ ||

ಆನನ್ದ ಪರಮಾನನ್ದಃ ಸಬೋಧಸ್ತ್ವಂ ಸುಖಂ ಚರ||೯||

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Ashtavakra Gita 

Chapter 1

Stanza 9

That Consciousness (in which) this universe appears, being conceived like a snake in a rope is Bliss --Supreme Bliss. You are that Consciousness. Be Happy. 

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Monday, 31 October 2022

एको विशुद्ध बोधोहमिति

अष्टावक्र गीता

अध्याय १

श्लोक ८

एको विशुद्ध बोधोहमिति निश्चय वह्निना।।

प्रज्वाल्याज्ञानगहनं वीतशोकः सुखी भव।।८।।

अर्थ :

आत्मा (के अर्थ में) मैं, दृष्टा-दृश्य के द्वैत से रहित विशुद्ध बोध हूँ इस निश्चयरूपी अग्नि से अपने गहन अज्ञान को जलाकर शोक से रहित हो जाओ और सुखी हो रहो।

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಾಯ ೧

ಶ್ಲೋಕ ೮

ಏಕೋ ವಿಶುದ್ಧ ಬೋಧೋऽಹಮಿತಿನಿಶ್ಚಯವಹ್ನಿನಾ ||

ಪ್ರಜ್ವಾಲ್ಯಾಜ್ನಾನಗಹನಂ ವೀತಶೋಹಃ ಸುಖೀ ಭವ||೮||

Ashtavakra Gita

Chapter 1

Stanza 8

Burn down the wilderness of ignorance with the fire of the knowledge : "I am the One and Pure Intelligence," and be free from grief and be happy!

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अहं कर्तेत्यहंमान

अष्टावक्र गीता 

अध्याय १,

श्लोक ७

अहं कर्तेत्यहंमान महाकृष्णाहि दंशितः।।

नाहं कर्तेति विश्वासामृतं पीत्वा सुखी भव।।७।।

अर्थ :

'मैं कर्ता', इस प्रकार के कर्तृत्व के अभिमान से ग्रस्त होना, - महान विषैले काले सर्प से दंशित होने के समान है। 'मैं कर्ता नहीं', विश्वास-रूपी इस अमृत का पान करो और सुखी हो रहो।

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಯನ ೧

ಶ್ಲೋಕ ೭

ಅಹಂ ಕರ್ತೇತ್ಯಹಂಮಾನ

ಮಹಾಕ್ರಷ್ಣಾಹಿ ದಂಶಿತಃ ||

ನಾಹಂ ಕರ್ತೇತಿ ವಿಶ್ವಾಸಾ-

ಮ್ರತಂ ಮೀತ್ವಾ ಸುಖೀ ಭವ||೭||

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Ashtavakra Gita

Chapter 1,

Stanza 7

Do you who have been bitten by the great black serpent of the egoism "I am the doer," drink the nectar of the faith "I am not the doer," and be happy.

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Thursday, 27 October 2022

एको दृष्टासि सर्वस्य

अष्टावक्र गीता 

अध्याय १

श्लोक ६

एको दृष्टासि सर्वस्य मुक्तप्रायोसि सर्वदा।।

अयमेव हि ते बन्धो दृष्टारं पश्यसीतरम्।।६।।

(एकः दृष्टा असि सर्वस्य मुक्तप्रायः असि सर्वदा। अयं एव हि ते बन्धः दृष्टारं / द्रष्टारं पश्यसि इतरम्।।)

अर्थ :

तुम ही सब / समष्टि के एक, और एकमेव दृष्टा हो, और अवश्य ही सब प्रकार से, सर्वत्र और सदा ही मुक्तप्राय ही हो। मुक्तप्राय इसलिए, क्योंकि जो यह एकमेव दृष्टा तुम हो, उसको तुम अपने से पृथक् किसी इतर या अन्य की भाँति देखते हो। यही तुम्हारा बन्धन है।

ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಾಯ ೧

ಶ್ಲೋಕ ೬

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ಏಕೋ ದ್ರಷ್ಟಾಸಿ ಸರ್ವಸ್ಯ ಮುಕ್ತಪ್ರಾಯೇऽಸಿ ಸರ್ವದಾ ||

ಅಯಮೂವ ಹಿ ತೇ ಬಂಧೋ ದ್ರಷ್ಟಾರಂ ಪಶ್ಯಸೀತರಮ್ ||೬||

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Ashtavakra Gita

Chapter 1

Stanza 6.

You are the one seer of all and really ever free. Verily your bondage is this alone, that you see the seer as other than such.

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Wednesday, 26 October 2022

ಧರ್ಮಾಧರ್ಮೌ

Virtue and Vice 

धर्माधर्मौ / धर्म अधर्मौ

धर्म और अधर्म

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Religion is tradition, ritual, cult, and may be Virtue or something different from Virtue as well. While the धर्म  / Dharma (in contrast and comparison with अधर्म / Adharma) in संस्कृत / Sanskrit, is synonymous with Virtue, and the अधर्म / Adharma is synonymous with Vice.

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अष्टावक्र गीता, अध्याय १, श्लोक ५,

Ashtavakra Gita, Chapter 1, Verse 5,

ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ, ಅಧ್ಯಾಯ ೧, ಶ್ಲೋಕ ೫,

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