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Tuesday, 12 September 2023

धरती के बेटे

।।पुत्रोऽहं पृथिव्याः।।

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संभवतः इसी ब्लॉग में मैंने विक्रम और प्रज्ञान की कथा लिखी है। किस प्रकार चन्द्रयान -2 चन्द्रमा की कक्षा में पहुँचा और उसने विक्रम को चन्द्रमा की सतह पर उतार दिया। किन्तु चन्द्रमा की सतह को छूने के लिए उतावले विक्रम का संतुलन बिगड़ने से वह वहीं लुढ़क गया था। धरती युगों युगों से उसके बेटे चन्द्रमा का हृदय टटोलने के लिए उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। वेद जानते हैं कि धरती स्मृति है जो पदार्थ है। चन्द्रमा मन है जो पृथ्वी से उत्पन्न हुआ है। मन भी तो स्मृति की ही संतान है! पुरुष-सूक्त के अनुसार भी मन का जन्म चन्द्रमा से हुआ है। विलोम न्याय (conversely) से चन्द्रमा का जन्म मन से हुआ है, इस दृष्टि से और पुरुषस्यापरिणामित्वात् के अनुसार भी "चन्द्रमा मनसो जातः" से दोनों ही अर्थ ग्रहण किए जा सकते हैं। सूक्ष्म और स्थूल दोनों ही एक ही कारण के दो रूप हैं और उन दोनों में से कौन किससे हुआ यह प्रश्न ही असंगत है। इस दृष्टि और अर्थ में सूक्ष्म, स्थूल तथा कारण पर्यायवाची शब्द हैं।

वेद के अनुसार चन्द्रमा और मंगल दोनों पृथ्वी की संतानें हैं। स्थूल चन्द्रमा पृथ्वी तत्व है तो सूक्ष्म चन्द्रमा पृथ्वी का अन्तर्मन है। जो पृथ्वी पर जीवन है, वही चन्द्रमा के रूप में सोम, रस, और सोमरस है। सूर्य प्राण और चन्द्रमा रयि है। मंगल भूमि से उत्पन्न होने से भौम कहलाता है। इससे भी विलोम-न्याय से देखें तो मंगल पर जीवन होने की संभावना बहुत अधिक है।

वेद कारण-ब्रह्म, पुराण सूक्ष्म ब्रह्म, और स्मृतियाँ ही स्थूल अर्थात् कार्य-ब्रह्म या प्रत्यक्ष-ब्रह्म हैं। चन्द्रमा ही मन और मन ही चन्द्रमा है।

विक्रम पराक्रम या मंगल / भौम है। प्रज्ञान या विज्ञान आज के युग का साइन्स, तकनीक, सूचना प्रौद्योगिकी है। प्रज्ञानं ब्रह्म से भी इसकी पुष्टि होती है।

इसरो / ईश्वर / ईश्वरो (वर्च्युअल ईश्वर) ने यदि चन्द्रयान के लैंडर और रोवर को विक्रम और प्रज्ञान नाम प्रदान किए हैं तो क्या यह अनुमान गलत होगा कि यह पूरा ही अभियान किसी ईश्वर (ब्रह्मा?) द्वारा पहले से सुनिश्चित विधान के अनुसार ही हो रहा होगा!

क्या यह कल्पना करना कठिन है कि अवश्य ही धरती के हृदय में पल रही अभिलाषा ही और अपने पुत्र के प्रति वात्सल्यपूर्ण पुत्र-प्रेम ही रहा होगा जिसकी अभिव्यक्ति चन्द्रमा को दुलारने के लिए मनुष्य के मन में इस रूप में हुई होगी!

और क्या चन्द्रमा ने भी इसका प्रत्युत्तर नहीं दिया, जिसे प्रज्ञान ने भूकम्प तरंगों के रूप में पहचानते हुए अंकित भी कर इसरो के वैज्ञानिकों तक प्रेषित भी कर दिया! 

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Tuesday, 2 August 2022

अस्तित्व एक रहस्य!

कविता : 01-08-2022

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यह जो है!!

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न तो यह कुछ भी है नया, न तो कुछ भी है पुराना, 

न तो कुछ भी नया हुआ है, न तो कभी भी था पुराना, 

तो आखिर ये सब क्या है, जो भी यह सब हो रहा है,

तो क्या ये है कोई सपना, या फिर सिर्फ, अफ़साना!!

ये जो है यह अपनी दुनिया, अपना ज़माना, जो भी  है,

क्या है ये भी सिर्फ सपना, है अजब, ये सारा ही अफ़साना,

क्या यह सब वही नहीं है, जो कि यह सब कुछ हो रहा है,

किसको सही पता है आखिर, है इसको किसने जाना!!

ये जो कि खुद ही हूँ मैं, या जो कुछ भी मन है मेरा,

क्या खुद मैं भी हूँ इसका, क्या खुद या मन है ये मेरा,

आखिर मैं खुद ही मन हूँ, या क्या मन भी कोई मेरा, 

किसको पता है आखिर, है इसको किसने जाना!!

क्या दुनिया ही खुद है मैं, और दुनिया खुद ही है मन, 

मन ही खुद है, ये सारा सब कुछ, क्या मैं ही दुनिया,

यहाँ जो कुछ भी हुआ है, या जो नज़र आ रहा है, 

जो कुछ कभी भी होगा, या फिर जो कि हो रहा है!!

क्या सिर्फ मैं ही बदल रहा हूँ, या मन भी बदल रहा है,

या फिर यह बदल रही है, जो भी मेरी है, ये दुनिया।

कुछ भी जो है बदलता, क्या वह वक्त ही नहीं है,

लेकिन क्या वक्त भी यह, सचमुच कभी बदलता!

या ये भी बस भरम है कि सब कुछ बदल रहा है,

जिसको भी है भरम ये, क्या वो भी बदल रहा है! 

ये बदलना, -न बदलना, ये भी तो है खयाल ही,

मजे की बात तो है कि, खयाल भी, बदल रहा है! 

तो, क्या मैं ही बदल रहा हूँ, या मन भी बदल रहा है,

ये दुनिया बदल रही है, या फिर वक्त ही बदल रहा है,

किसको पता है आखिर, है इसको किसने जाना!

जो कुछ भी हमने माना, वो सब तो बदल रहा है,

जो कुछ भी हमने जाना, वो सब तो बदल रहा है,

तो सवाल बस यही है, आखिर ये 'जानना' भी,

किसको पता है आखिर, है इसको किसने जाना!

जरा गौर कीजिए भी, ये जानना भी क्या है, 

क्या ये कभी बना है, क्या ये कभी मिटा है,

क्या ये बनकर है मिटता, या बनता है मिटकर,

क्या यह कभी पुराना, या फिर कभी नया है!

किसको पता है आखिर, है इसको किसने जाना,

क्या ये भी खयाल है कोई, जिसको है हमने माना,

यह सब में ही हुआ करता, है यह जो हमेशा ही,

यह जानने-वाला भी क्या हमेशा ही नहीं होता,

किसको पता है आखिर, है इसको किसने जाना!! 

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