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Wednesday, 20 July 2022

वायरल होने के ख़तरे

The Risk in Being Viral.

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कोविड 19 के प्रारंभ होने के बाद से वायरल होने के प्रति लोगों में चिन्ता, जागरूकता और सतर्कता बहुत बढ़ गई है। लेकिन वायरल तो वायरल है, यह किसे कब कहाँ हो जाए, कुछ नहीं कह सकते। फिर, वायरल खबर हो सकती है, बीमारी या कोई वीडियो भी वायरल हो सकता है! खबर हो तो आप उस पर अपनी रीएक्शन देकर उससे छुटकारा पा सकते हैं, बीमारी हो तो डॉक्टर से मिल सकते हैं लेकिन यदि आप स्वयं ही वायरल हो गए तो स्थिति चिन्ताजनक हो सकती है! उदाहरण के लिए आपकी कोई पोस्ट वायरल हो गई तो बहुत लोग आपके बारे में जानने लगेंगे, बहुत से लोग आपसे मिलना चाहेंगे, जिनमें पता नहीं कौन कौन किस प्रकार के होंगे। रिलेटिव्स, पत्रकार, दोस्त, एक्टीविस्ट, परिचित, शत्रु, शुभचिन्तक, अजनबी, और फैन्स या प्रशंसक। सरकारी या दूसरे विभागों से संबंधित लोग। सबकी कुछ समस्याएँ होंगी, सबकी आपसे आशाएँ, अपेक्षाएँ, आग्रह,  आलोचनाएँ, विवेचनाएँ, आग्रह, दुराग्रह, समीक्षाएँ होंगी। बातें तो होंगी ही। फिर आप किस किस को जवाब देंगे? और क्या जवाब देंगे?

"कुछ भी!"

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Monday, 4 December 2017

कुछ भी! कविता

कुछ भी!
कलर-ब्लाइन्ड !
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सौन्दर्य,
बस एक ही तो रंग है क़ुदरत का,
कभी नज़र आता है,
तो कभी-कभी दिखाई नहीं देता ।
और दूसरे रंग खो चुके हैं अब,
मेरा टॉमी भी यही कहता है,
उसे सब कुछ बस भूरा दिखाई देता है,
मुझको अफ़सोस है उसके लिए,
क्या वह और रंग नहीं देख पाता?
वह बस पहचानता है गंध से बस,
और हँसता है मुझ पर,
जब मुझे अच्छी-बुरी गंध की पहचान नहीं होती!
वह भौंकता रहता है मेरी गर्ल-फ़्रैंड पर,
और मैं उसे रोकता रहता हूँ!
तब वह मुझ पर भी भौंकने लगता है !
मेरी गर्ल-फ़्रैंड यूँ तो ख़ूबसूरत है,
इसलिए यही एक रंग मुझे,
उसमें दिखाई देता है,
और उसकी गंध भी है मादक,
फिर क्यों टॉमी को वह नहीं भाती?
मैं नहीं छोड़ सकता टॉमी को,
मैं नहीं छोड़ सकता गर्ल-फ़्रैंड को,
और दोनों ने मुझे छोड़ दिया है !
पर मुझे फ़र्क़ नहीं पड़ता कोई!
बस एक ही तो रंग है क़ुदरत का!
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और अफ़सोस यह भी,
कि मुझे जीवन और मृत्यु के रंग भी,
अलग-अलग नहीं दिखाई देते!
इसलिए भी शायद,
लोग मुझे पसंद नहीं करते !
क्योंकि मेरी नज़र में,
बस एक ही तो रंग है क़ुदरत का!
हाँ, मैं कलर-ब्लाइन्ड हो चला हूँ !
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