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Wednesday, 25 January 2023

विश्वं नाम विकल्पना

अष्टावक्र गीता

अध्याय ७

श्लोक ३

मय्यनन्तमहाम्बोधौ विश्वं नाम विकल्पना।।

अति शान्तो निराकार एतदेवाहमास्थितः।।३।।

(मयि अनन्त महा अम्बोधौ विश्वं नाम विकल्पना। अति शान्तः निराकारः एतत् एव अहं आस्थितः।।)

अर्थ : मुझ अनन्त बोधरूपी महासमुद्र में एक विपरीत कल्पना नामरूप मात्र है, जिसका नाम विश्व है । अति शान्त मैं निराकार स्वरूप में निज नित्य आत्मा की तरह अवस्थित हूँ।

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಾಯ ೭

ಶ್ಲೋಕ ೩

ಮಯ್ಯನನ್ತಮಹಾಮಮ್ಬೋಧೌ ವಿಶ್ವಂ ನಾಮ ವಿಕಲ್ಪನಾ||

ಅತಿ ಶಾನ್ತೋ ನಿರಾಕಾರ ಎತದೇವಾಹಮಾಸ್ಥಿತಃ||೩||

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Ashtavakra Gita

Chapter 7

Stanza 3

In Me, The Consciousness as The Boundless ocean, the universe is the imagination only. While I am highly tranquil and formless. In this Reality I do abide.

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Thursday, 29 December 2022

उद्भूतंज्ञानदुर्मित्रम्

अष्टावक्र गीता

अध्याय ३

श्लोक ७

उद्भूतंज्ञानदुर्मित्रमवधार्याति दुर्बलः।।

आश्चर्यं काममाकांक्षेत् कालमन्तमनुश्रितः।।७।।

(उद्भूतं ज्ञानदुर्मित्रं अवधार्याति दुर्बलः। आश्चर्यं कामं आकाँक्षेत् कालं अन्तं अनुश्रितः।।)

अर्थ : आश्चर्य की बात है कि कामना (आत्म-)ज्ञान की शत्रु है, और अन्तकाल भी समीप है, इसे ठीक से जानने पर भी, फिर भी कोई अत्यन्त वृद्ध, दुर्बल मनुष्य, विषयों के उपभोग करने की आकांक्षा से लालायित रहे । 

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಾಯ ೩

ಶ್ಲೋಕ ೭

ಉದ್ಭೂತಂ ಜ್ಞಾನದುರ್ಮಿತ್ರ-

ಮವಧಾರ್ಯಾತಿ ದುರ್ಬಲಃ||

ಆಶ್ಚರ್ಯಂ ಕಾಮಮಾಕಾಂಕ್ಷೇತ್ 

ಕಾಲಮನ್ತಮನಾಶ್ರಿತಃ||೭||

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Ashtavakra Gita

Chapter 3

Stanza 7

It is strange that knowing lust to be enemy of knowledge, one who has grown extremely weak and reached one's last days, should yet be eager for sensual enjoyments. 

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