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Thursday, 9 March 2023

आपदः संपदः काले

अष्टावक्र गीता

अध्याय ११

श्लोक ३

आपदः संपदः काले दैवादेवेति निश्चयी।।

तृप्तः स्वस्थेन्द्रियो नित्यं न वाञ्छति न शोचति।।३।।

(आपदः संपदः काले दैवात् एव निश्चयी। तृप्तः स्वस्थ-इन्द्रियः नित्यं न वाञ्छति न शोचति।।)

अर्थ : जिसे यह निश्चय हो जाता है कि समृद्धि, सम्पत्ति और विपत्ति समय समय पर दैव से ही प्राप्त हुआ करती है वह नित्य ही स्वस्थचित्त होता है, उसे न तो कोई कामना होती है, न कोई चिन्ता।

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಾಯ ೧೧

ಶ್ಲೋಕ ೩

ಆಪದಃ ಸಂಪದಃ ಕಾಲೇ ದೈವಾದೇವೇತಿ ನಿಶ್ಚಯೀ||

ತೃಪ್ತಃ ಸ್ವಸ್ಥೇನ್ದ್ರಿಯೋ ನಿತ್ಯಂ ನ ವಾಞ್ಛತಿ ನ ಶೋಚತಿ||೩||

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Ashtavakra Gita

Chapter 11

Stanza 3

Knowing for certain that adversity and prosperity come in (their own) time through fate, one is ever contented, has all his senses in control and does not desire or grieve.

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Monday, 2 January 2023

मायामात्रमिदंविश्वं

अष्टावक्र गीता

अध्याय ३

श्लोक ११

मायामात्रमिदंविश्वं पश्यन् विगतकौतुकः।

अपि सन्निहिते मृत्यौ कथं त्रस्यति धीरधीः।।११।।

(माया-मात्रं इदं विश्वं पश्यन् विगतकौतुकः। अपि सन्निहिते मृत्यौ कथं त्रस्यति धीरधीः।।)

अर्थ : इस समस्त दृश्यजगत् को केवल माया ही समझकर उसी दृष्टि से देखते हुए, धीर पुरुष कदापि विस्मित नहीं होता, यहाँ तक कि मृत्यु सन्निकट होने पर भी वह उससे त्रस्त नहीं होता।

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಾಯ ೩

ಶ್ಲೋಕ ೧೧

ಮಾಯಾಮಾತ್ರಮಿದಂ ವಿಶ್ವಂ ಪಶ್ಯನ್ ವಿಗತಕೈತುಕಃ||

ಅತಿ ಸನ್ನಿಹಿತೀ ಮೃತ್ಯೌ ಕಥಂ ತ್ರಸ್ಯತಿ ಧೀರಧೀಃ||೧೧||

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Ashtavakra Gita

Chapter 3

Stanza 11

Viewing this universe as mere illusion and losing all interest therein, how can one of steady mind fear even the approach of death!

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