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Saturday, 4 March 2023

राज्यं सुताः कळत्राणि

अष्टावक्र गीता

अध्याय १०

श्लोक ५

राज्यं सुताः कळत्राणि शरीराणि सुखानि च।।

संसक्तस्यापि नष्टानि तव जन्मनि जन्मनि ।।५।।

(राज्यं सुताः कळत्राणि शरीराणि सुखानि च। संसक्तस्य अपि नष्टानि तव जन्मनि जन्मनि।।)

अर्थ : वे राज्य, पुत्र पौत्र और परिवार, शरीर और सुख जिनमें तुम जन्मों जन्मों तक यद्यपि संसक्त थे, सभी नष्ट हो गए।

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಾಯ ೧೦

ಶ್ಲೋಕ ೫

ರಾಜ್ಯಂ ಸುತಾಃ ಕಳತ್ರಾಣಿ ಶರೀರಿಣಿ ಸುಖಾನಿ ಚ||

ಸಂಸಕ್ತಸ್ಯಾಪಿ ನಷ್ಣಾನಿ ತವ ಜನ್ಮನಿ ಜನ್ಮನಿ||೫||

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Ashtavakra Gita

Chapter 10

Stanza 5

Kingdoms, sons, wives, bodies and pleasures have been lost to you birth after birth, even though you were attached (to them).

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Friday, 3 March 2023

त्वमेकश्चेतनः

अष्टावक्र गीता

अध्याय १०

श्लोक ५

त्वमेकश्चेतनः शुद्धो जडं विश्वमसत्तथा।।

अविद्यापि न किञ्चित्सा का बुभुत्सा तथापि ते।।५।।

(त्वं एकः चेतनः शुद्धः जडं विश्वं असत् तथा। अविद्या अपि न किञ्चित् सा का बुभुत्सा तथापि ते।।)

अर्थ : तुम एकमेव (सत्-अद्वितीय) अतः शुद्ध हो, जबकि विश्व जड और असत् है। (जिसे अविद्या कहा जाता है), अविद्या भी इसी प्रकार असत् है अर्थात् केवल विकल्प / शब्द है। फिर ऐसा क्या रह जाता है, जिसे तुम जानने के लिए तुम उत्सुक हो?

(शब्दज्ञानानुपाती वस्तुशून्यो विकल्पः।।९।। समाधिपाद)

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ಅಷ್ಟಾವಕ್ರ ಗೀತಾ

ಅಧ್ಯಾಯ ೧೦

ಶ್ಲೋಕ ೫

ತ್ವಮೆಕಶ್ಚೇತನಃ ಶುದ್ಧೋ ಜಠಂ ವಿಶ್ವಮಸತ್ತಥಾ||

ಅವಿದ್ಯಾಪಿ ನ ಕಿಂಚಿತ್ಸಾ ಕಾ ಬುಭುತ್ಸಾ ತಥಾಪಿ ತೇ||೫||

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Ashtavakra Gita

Chapter 10

Stanza 5

You are One, Intelligent / Intelligence and pure. The universe is non-intelligent and non-existent. Ignorance too has no essence or substance. Yet what desire to know there can be for you!

(Ignorance is but an empty, sense-less word.)

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